परिचय: क्या है निरजला एकादशी?
हिंदू धर्म में एकादशी उपवास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना गया है। वर्ष भर में कुल 24 एकादशियाँ आती हैं, जिनमें से “निरजला एकादशी” को सबसे कठिन और सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह उपवास ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आता है, और इसका विशेष महत्व इस बात में है कि इस दिन जल तक का सेवन वर्जित होता है- इसलिए इसका नाम पड़ा “निर-जला”।
इतिहास और पौराणिक कथा (Why is Nirjala Ekadashi observed?)
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के समय में पांडवों के भाई भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह सकते थे। अतः वे अन्य एकादशी उपवास नहीं कर पाते थे। उन्होंने ऋषि व्यास जी से इसका समाधान पूछा। व्यास जी ने बताया कि अगर भीम केवल निरजला एकादशी का उपवास पूर्ण नियम से कर लें, तो उन्हें पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो सकता है।
भीमसेन ने यह कठिन व्रत किया और तब से इसे “भीमसेनी एकादशी” भी कहा जाने लगा।
निरजला एकादशी का महत्व (Importance of Nirjala Ekadashi)
– सभी एकादशियों का फल केवल एक उपवास से प्राप्त होता है।
– व्रती को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
– यह व्रत आत्म-संयम, शुद्धता और भक्तिभाव को जागृत करता है।
– शरीर और मन दोनों की शुद्धि का अवसर देता है।
– विष्णु भक्ति का सर्वोच्च रूप माना जाता है।
– स्कंद पुराण, पद्म पुराण और भागवत पुराण में इस उपवास का वर्णन मिलता है।
व्रत की विधि (Nirjala Ekadashi Vrat Vidhi)
– उपवास की पूर्व रात्रि को सात्विक भोजन लें और व्रत का संकल्प लें।
– ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
– भगवान श्री विष्णु की पूजा करें – उन्हें तुलसी पत्र, पीले फूल, पीला वस्त्र, और चंदन अर्पित करें।
– मंत्र जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
– दिन भर निराहार और निर्जल रहें।
– शाम को दीप जलाएं और भगवान विष्णु की आरती करें।
– रात्रि में जागरण करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
– द्वादशी तिथि को ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को जल, अन्न, छाता, वस्त्र आदि का दान कर व्रत का पारण करें।
क्या न करें इस दिन (What not to do on Nirjala Ekadashi)
– तामसिक भोजन जैसे मांस, लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
– जल या पेय पदार्थ का सेवन न करें (स्वास्थ्य संबंधी कारणों में फलाहार कर सकते हैं)।
– झूठ, क्रोध, और निंदा से दूर रहें।
– नींद में अधिक समय न बिताएं; जागरण करें।
– व्रत तोड़ने के लिए मध्यरात्रि तक प्रतीक्षा न करें; द्वादशी तिथि में पारण करें।
इस दिन क्या करें? (What should you do on Nirjala Ekadashi)
– विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
– गीता, भागवत या विष्णु पुराण का श्रवण/पाठ करें।
– ज़रूरतमंदों को जल दान और फल दान करें।
– घर में तुलसी पौधे को जल अर्पित करें।
– अपने अंदर संयम और भक्ति का संकल्प लें।
निरजला एकादशी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Benefits)
– गर्मियों में जल का त्याग शरीर को डिटॉक्स करता है।
– उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है।
– मानसिक नियंत्रण और आत्म-अनुशासन को बढ़ावा मिलता है।
– दिन भर की भक्ति मन को शांत करती है और तनाव कम करती है।
दान का महत्व (Charity on Nirjala Ekadashi)
इस दिन किया गया दान 100 गुना फलदायक होता है। विशेषकर जल से भरे घड़े, छाता, सत्तू, शरबत, पंखा, फल आदि का दान करने से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन गाय, ब्राह्मण, गरीबों को अन्न-वस्त्र दान करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
निरजला एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आत्म-संयम, आस्था और सेवा का संगम है। यह जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, शारीरिक शुद्धता, और मानसिक बल प्रदान करता है। जो व्यक्ति श्रद्धा व नियम से इस दिन व्रत करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति और प्रभु विष्णु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
संदेश:
“यदि आप साल भर की एकादशी नहीं कर सकते, तो केवल निरजला एकादशी जरूर करें – यह सब व्रतों का फल देने वाला पर्व है।”



